‘शारीरिक श्रम’ तो अपनी जगह है ही लेकिन महिलाओं के लिए ‘मानसिक बोझ’ (मेंटल लोड) और इमोशनल लेबर उससे कहीं ज़्यादा थकाऊ-पकाऊ-चिड़चिड़ाऊ चीज़ है! चलो एक आम भारतीय स्त्री के सिर्फ़ 24 घंटे के कामों का हिसाब करत...
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‘शारीरिक श्रम’ तो अपनी जगह है ही लेकिन महिलाओं के लिए ‘मानसिक बोझ’ (मेंटल लोड) और इमोशनल लेबर उससे कहीं ज़्यादा थकाऊ-पकाऊ-चिड़चिड़ाऊ चीज़ है! चलो एक आम भारतीय स्त्री के सिर्फ़ 24 घंटे के कामों का हिसाब करत...