2015 में गडकरी ने कहा था कि दो साल में दिल्ली को जाम मुक्त कर देंगे, 2021 भी जा रहा है।

 

दिसंबर 2015 की ख़बरें पलट रहा था। उस महीने की ख़बरों में एक ख़बर धूम-धड़ाके के साथ एलान कर रही थी कि दो साल के भीतर दिल्ली जाम मुक्त हो जाएगी। एकाध ख़बरों में लिखा है कि डेढ़ साल में दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या आधी हो जाएगी।

ये सारे दावे परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किए हैं और कई जगहों पर छपे हैं। हुआ यह था कि नितिन गडकरी गुरुग्राम के होंडा चौक से दिल्ली की तरफ आ रहे थे लेकिन दो घंटे तक जाम में फंसे रहे। उसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को फोन करना शुरू किया और 24 घंटे के भीतर जाम मुक्त करने के लिए निर्देश दिए।

इसी तरह की बातें हर तरफ छपी हैं। क्या दिल्ली दो साल में यानी 2015 से 2018 के बीच जाम मुक्त हो गई? क्या दिल्ली में लगने वाला जाम आधा हो गया?

इससे संबंधित और ख़बरों की तलाश शुरू कर दी। सितंबर 2018 की ख़बर है कि दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया है कि दिसंबर 2020 तक दिल्ली को कैसे जाम मुक्त किया जाएगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार दिल्ली पुलिस के टास्क फोर्स ने 77 ऐसी जगहों की पहचान है जहां पर जाम लगता है।

इसमें से 28 ऐसी जगहें हैं जहां भयंकर जाम लगता है। जहां जाम समाप्त करने की योजना पर काम किया जाएगा। ख़बर में इन जगहों के नाम नहीं हैं इसलिए उदाहरण देकर पूछना मुश्किल है कि क्या इनमें से किसी सड़क पर आपने जाम मुक्त अनुभव किया है।

अक्तूबर 2018 की हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर छपी है। इसमें बताया गया है कि आश्रम को जाम मुक्त करने लिए 2016 में एक प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी वह कागज़ों पर हैं। इसके तहत मथुरा रोड पर निज़ामुद्दीन से बदरपुर की सड़क को अंडरपास के ज़रिए सिग्नल मुक्त कर दिया जाएगा।

यही नहीं 125 करोड़ की लागत से आश्रम फ्लाईओवर को DND फ्लाईवे तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। अंडर पास को मार्च 2018 तक बन जाना था लेकिन प्रोजेक्ट अटक गया है।

अगस्त 2021 में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट छपी है। 2016 में आश्रम अंडरपास को मंज़ूरी मिली, काम शुरू हुआ जुलाई 2019 में। 750 मीटर लंबे अंडर पास का लक्ष्य है आश्रम फ्लाईओवर के पास जाम को समाप्त करना। इस प्रोजेक्ट को पहले मार्च 2018 तक बन जाना था।

फिर कहा गया कि जून 2021 तक तैयार हो जाएगा। कोविड के कारण इसकी समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2021 कर दी गई। एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार अधिक से अधिक दो ढाई महीने की और देरी होगी लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। 2015 में जिस तेवर से नितिन गडकरी ने बयान दिए उससे छवि बनी होगी कि गडकरी काम करने वाले मंत्री हैं लेकिन एक अंडरपास का ये हाल है।

16 सितंबर 2021 की PIB की एक प्रेस रिलीज़ है। PIB सरकारी सूचना एजेंसी है। इसमें नितिन गडकरी का बयान छपा है कि दिल्ली-एनसीआर में 53000 करोड़ के 15 प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी गई है। 14 प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। इनके पूरा होते ही दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण कम हो जाएगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी ख़त्म हो जाएगी।

53000 करोड़ तो बहुत है। प्रेस रिलीज़ में डिटेल नहीं है कि इनमें से कितना प्रोजेक्ट दिल्ली के भीतर है, दिल्ली की सीमाओं पर है, और कैसे ये दिल्ली में जाम की समस्या का समाधान करेंगे।

दिसंबर 2015 से सितंबर 2021 के बीच आपने नितिन गडकरी के बयान और दावों का हाल देख लिया। अगर आप दिल्ली में हर दिन चलते हैं तो बता सकते हैं कि क्या दिल्ली जाम मुक्त हो गई है? एक और बात है।

जितना मर्ज़ी फ्लाईओवर और अंडरपास बनाना है, 53000 करोड़ की जगह 1 लाख करोड़ का बना लीजिए जब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट की संस्कृति पर इतने पैसे खर्च नहीं होंगे ये सारे पैसे बेकार साबित होंगे। कुछ समय के लिए जाम से मुक्ति मिलेगी लेकिन जल्दी ही इन पर भी जाम लगने लगेगा।

अगर ये ग़लत लगता है कि अपने इलाके के किसी फ्लाईओवर और अंडरपास का अध्ययन कीजिए। देखिए कि इसके बनने के वक्त क्या दावा किया गया और बन जाने के चार पांच साल बाद क्या स्थिति है।

आपको अपवाद के रूप में कुछ उदाहरण मिल जाएगा लेकिन नियम के रुप में देखेंगे कि बिना पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विकास के ये सारे पैसे बर्बाद होंगे। इनकी कीमत आप चुकाएंगे। इन पैसे को अगर सामाजिक सुरक्षा पर खर्च किया जाता, अस्पताल और शिक्षा पर खर्च होता तो हमारे आपके जीवन में तनाव कम होता।

आप टोल और एक्सप्रेस वे से कार की समस्या का समाधान नहीं पा सकते। दुनिया के ऐसे किसी देश को यह समाधान नहीं मिला है जह…

 

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source ravish kumar

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